Monday, 17 August 2020

Main kartik bol raha hu मै कार्तीक बोल रहा हूँ ...immature grand-son.

 i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcource)


i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.

One way its like 'vikram aur betal' theme where n number of stories are posible !!

every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.




my script attempt
script-5: 18-Aug-2020

Phone की ring बजती है....

कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ

डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड,
महाराष्ट्र के एक बहूत ही सिनीयर लीडरने, अपने पोते को फटकार लगाई कि वोह बहूत immature है और उसकी बातोंको वह लीडर कौडी की भी किमत नही देते.
पोते से जुर्म यह हुवा कि उसने
राममंदिर का पूजन की बधाई दी और "जय श्रीराम" कह दिया जो की इनकी पार्टी के उसूलोंके खिलाब है !!!!

क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद कुछ पंक्तीया याद आ रही है..
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ....ड

डॅड :  पोता ये गाने गाना चाहीये,

दादे अब्बा,दादे अब्बा मान जाओ,
छोडो सारा गुस्सा,
जरा हँस के दिखाओ....
दादे अब्बा दादे अब्बा मान जाओ.

या फिर

बडे मिया दीवाने,ऐसे ना बनो,
जमाना क्या चाहे,हम से सुनो.

या फिर

मै हो गया बदनाम,
मुझको बुढ्ढा  मिल गया,
मै क्या करु राम,
मुझे बुढ्ढा मिल गया !!

बेटे,कुछ पाचसो साल बाद यह शुभघडी आयी है, सब को खुष होना चाहीये.

कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की......
immature पोता नही,
immature तो दादाजी है.
कैसे?
जमाना बदल गया है ,अब minority नही majority को खुष करने के दिन आ गये.यह बात smart पोता तो समझ गया पर अडीयेल दादाजी नही.

दूसरी बात, क्या तुमने गौर किया? दादाजी कौडीयो की बात करते है,जब के जमाना digital currency और online payment की बात करता है.

कार्तीक : आप कहना क्या चाहते हो?

डॅड : ये के दादाजी बहूत पिछे रह गये है.
दादाजी को एक चाभी मिली थी, वोट बँककी राजनिती और जुम्माचुम्मा की. परंतु एक ही चाबी से क्या नये जमानेके सारे ताले खुलेंगे क्या?? one key cannot open all locks bete.

वैसै भी धोकाधाडी करनेवाला श्रीराम की नीती नही समझ पायेगा.

रघुकुल रीत सदा चल आई,

 प्राण जाए पर वचन न जाई


कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: जो रामजी की ईच्छा बेटे.







Saturday, 1 August 2020

आनंद बनसोडे :एकेकाळी नववी नापासचा शिक्का, आता त्याच इयत्तेच्या पुस्तकात धडा; सोलापुरच्या पोराची यशोगाथा Source of continuous inspirstion

Thanks to Loksatta dated 02-Aug-2020
copy paste

आनंद बनसोडे ANAND BANSODE

एकेकाळी नववी नापासचा शिक्का, आता त्याच इयत्तेच्या पुस्तकात धडा; सोलापुरच्या पोराची यशोगाथा – https://www.loksatta.com/photos/todays-photo-3/2233837/solapur-anad-bansode-success-story-inspirational-success-stories-nck-90/










*********************************************

http://buddhistvoice.com/index.php/2018/07/29/mountaineer-anand-bansode/

**********************************************





Thursday, 30 July 2020

मै कार्तीक बोल रहा हूँ....राममंदिर

 (photo from internet with Thanks)

i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcource)

i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.
every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.


my script attempt
script-4: 30-July-2020

Phone की ring बजती है....

कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ

डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड,
बहूत जल्दी राममंदिर का पूजन होने जा रहा है, लेकिन कुछ नाकारे लोग बडे जल रहे,और राममंदिर पूजन के विरोधमें कैसी कैसी बयानबाजी कर रहे है.

क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद कुछ पंक्तीया याद आ रही है..
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ....ड

डॅड : 

खुलती बसंत जैसे
धुलता कलंक जैसे
दिल की दरार में हो प्यार का सीमेंट जैसे
अखियों ही अखियों में जंग की फ्रंट जैसे
मिल जाए सदियों से अटका रिफंड जैसे


या फिर,

रामा रामा गजब हुई गवा रे -
हाल हमरा अजब हुई गवा रे
दिल मचल सा गया है
कुछ बदल सा गया है
जाने कैसे ये कब हुई गवा रे
रामा रामा हो रामा रामा रामा रामा ...
किसने जादू चलाया
बरसों में जो हो न पाया
एक पल में वो सब हुई गवा रे
रामा रामा हो रामा रामा

कुछ पाचसो साल बाद यह शुभघडी आयी है, सब को खुष होना चाहीये.
दिवाली के पहले एक दिवाली आयी है.

कार्तीक : डॅड, कौई एक अकल का दुश्मन कह रहा है कि पंधरा मिनीट के लिये पुलीस...

डॅड : देखो बेटे,

यहाँ चौड़ी छाती वीरों की,
यहाँ भोली शक्लें हीरों की,

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम,
दुश्मन के लिये तलवार हैं हम,
मैदान में अगर हम दट जाएं,
मुश्किल है के पीछे हट जाएं,


कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की......
इस देश का नाम हिंदूस्तान है और रहेगा.
तो जाहीर सी बात है के जो मेजाॅरीटी जनता चाहेगी वह होगा.
दूसरी बात यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है,
तो सब कुछ बाकायदा हो रहा ,बेकायदा नही.
तो भलाई इसी में है के प्यार से इसमें शामिल हो जाये.

कार्तीक : पर डॅड इससे रोजगार मिलेगा क्या ?

डॅड : देखोबेटे,मंदिर बननेपर देश भरके और दुनियाभरके श्रद्धालू और टूरिस्ट उमड आयेंगे.
तो रेल्वेस्टेशनपर अब्दूलचाचा कहेंगे,बैठो तांगेमें चलो रामलल्ला के दर्शनके लिये,
एअरपोर्टपर इजाज ड्रायव्हर कहेगा, सर , मॅम आईये,आपको मंदिर छोडता हूँ.
फ्रांसीस कहेगा सर हाॅटेल रुम्स रेडी है, राजू गाईड कहेगा,आईये मै आप को बारीकीसे जानकारी देता हूँ, रामप्यारी पूजा के लिये फूल बेचेगी,मॅथ्यूज नारीयल बेचेगा, मथूरा हलवाई प्रसाद के लड्डू बेचेंगे, कपडे,सारीयाँ,बर्तन आदी दूकाने कारोबार करेगी.रस्ते चौडे हो जायेंगे, बागबगिचे मे फूल महकेंगे,खुषी से डोलेंगे.

कार्तीक : आप कहना क्या चाहते हो?

डॅड : शीश झुकाओ राम गुण गाओ
बोलो जय विष्णु के अवतारी

रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी

कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: जो रामजी की ईच्छा बेटे.




Wednesday, 1 July 2020



आली एकादशी
ग्रासे जरी कोविड
मुखी तरी गोविंद
वारकरी

हाती ग्लोव्हज्
मुखी मास्क
एकची टास्क
नाचूरंगी

सॅनीटाझर ची उधळण
वैष्णवां ना ताप
डोळ्यांपुढे बाप
पांडूरंग

कसले हे वर्ष
यंदा नाही वारी
तूच देवा तारी
भक्तजना

एकमेका आता
नाही लोटांगणे
उभी घटींगणे
पोलीस ते


युगे चार मास
राबताती अथक
सफाई मदतनीस
डाॅक्टर,नर्स,पोलीस
रात्रंदिस


तुझ्यात पांडूरंग
म्हणोनी वारकरी
पोलीस पाय धरी
होत धन्य
🙏🏻🙏🏻🙏🏻



-- राजेश मोराणकर
१-जुलै- २०२०

Friday, 26 June 2020

मै कार्तीक बोल रहा हूँ,...mai kartik bol raha hu take-3

i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcource)

i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.
every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.
( last, bimari se lade, bimar se nahi is new change as heard on radio)

my script attempt
script-3: 26-June-2020

Phone की ring बजती है....

कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ

डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड,
महाराष्ट्र में एक बहूतही सिनीयर बुजूर्ग नेता को किसीने कोरोना कह दिया,
तो उनके पार्टीके समर्थकोंने पलटवार मे,इनके पार्टी नेता को महारोगी कह दिया
क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद कुछ पंक्तीया याद आ रही है..
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ....ड

डॅड : सर्दी खाँसी ना मलेरिया हूआ,
मै गया यार मुझको,
लव्हेरिया हूआ.

या फीर

मेरा पढने में नही लागे,
हो गयी ये कैसी मुश्कील,
कही मुझे "वोह" तो नही हो गया

या फीर

मै हूँ प्रेमरोगी
मेरी दवा तो कराओ.

कार्तीक : डॅड, आप क्या चिल्लर रोगोंका नाम लेते हो, लोग कोरोना के नाम से गाली दे रहे है.

डॅड : देखो बेटे,
" हूस्न हाजीर है,
मुहाबत की सजा पाने को,
कोई पत्थर से ना मारो,
मेरे दिवाने को"
ऐसा जिसने कोरोना कहा उसके नेता कह रहे है. वैसे उन का नाम अब "फडफड"नवीस कहना चाहीये क्योंकी वह काफी फडफडा रहे है, पिछले साल जब बाढ  आयी थी तो यह साहब महाजनादेशयात्रा प्रचार मे मगन थे,अब अफसोस कर रहे है.

कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की......
पहले नेता एक दूसरे को जानवरोंके नाम से गाली देते थे,अब शायद उन्हे एहसास हुआ के जानवर इतने बुरे नही होते,
इसलिये trend setter बनके इन्होने कोरोना गाली पर अपना मुहर जमा करके
अपना काॅपीराईट बना लिया है.

कार्तीक : डॅड, आप कहना क्या चाहते हो?

डॅड : बेटे अंदर से सब मिले हूवे है,एकदूसरोंके रिश्तेदार भी है क्यों की आपसमे बेटिओंकी शादीयाँ जो की है.
यह तो बस जल्दीसे इन्होंने काॅपीराईट बनालिया इस डर से की कही सामनेवाला हमसे पहले हमे कोरोना ना कहे.

कलको अगर दोनो, एक दूसरे को ताली दे कर हँसते हूवे नजर आये तो,चौंक मत जाना.

कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: बिमारी से लडे, बिमार से नही.

Wednesday, 8 April 2020

हनूमानाकडून आज काय शिकायचं...,

हनूमान जयंती च्या शुभेच्छा

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।




मला शाळेचे दिवस आठवले,
आम्ही मंदिरात जायचो,
परीक्षांचे दिवस जवळ आलेले असायचे,
आम्ही, हनूमाना,मारुतीराया मला पास कर एवढेच मागायचो....
आमच्या अल्पसंतुष्टीवर मारुतीराय गालात हसत असतील !!

आम्ही मोठे झालो आणि
" हजारो हसरतें ऐसी,
कि ऐकऐक पर दम टूटे "
अशी अवस्था झाली  !!

तो विषय नाहीये,
बुद्धीमतां वरीष्ठं हनूमानाकडून काय शिकलो हा आहे.

सुधा मूर्ती ऐका कथेत सांगतात,
त्यांच्या शिक्षीका गोष्ट सांगत,आणि त्यातून काय शिकायचं हे ही.

तर द्रोणागिरी वरुन संजीवनी वनस्पती आणण्यासाठी हनूमान गेले असता, चूकी ची शक्यता शून्य करण्यासाठी ते पूर्ण pharmacy अर्थात द्रोणागिरी पर्वत च घेऊन आले !
(हनूमानाने विराट रूप धारण केल्याने द्रोणागिरी लहान दिसू लागला, तळहातावर घेऊन आले...)

यातून शिकण्यासारखा global संदेश काय ?????

स्वत:ला समस्येपेक्षा मोठे करा !!

हा आहे.
point to be noted milord
देवदास प्रमाणे दु:खाच्या भिंगातून पाहिले तर क्षूद्र  गोष्टी हत्तीएवढ्या दिसू शकतात
दू:खं देवदास बनून उगाळल्याने कमी न होता आणखी गडद होऊन त्याचीच झिंग चढते.

त्यापेक्षा,

दुनिया में कितना गम है,
मेरा गम कितना कम हे,
लोगोंका गम देखा तो,
मै अपना गम भूल गया...
(आनंद बक्षी)

असा approach ठेवला तर आपण समस्येपेक्षा नक्कीच मोठे होऊ शकतो.

हेच तर आज शिकायचं.

Monday, 2 March 2020

धन्यवाद www.deshdoot.com तसेच अशोक आरगडे,ओम शेती, विश्वनगर, पुणे हायवे ग्रीन गोल्ड सिड जवळ, वाळूज तालुका गंगापुर, जिल्हा औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत 431133



www.deshdoot.com  अशोक आरगडे,ओम शेती, विश्वनगर, पुणे हायवे ग्रीन गोल्ड सिड जवळ, वाळूज तालुका गंगापुर, जिल्हा औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत 431133



copy and paste
with Thanks

शेती या व्यवसायात आधुनिक तंत्रज्ञानाचा जसा विकास होत गेला तसाच हा व्यवसाय अधिक गुंतागुंतीचा होत गेला. त्यामुळे शेती व्यवसायात हिशोब, नियोजन व अंदाजपत्रक इत्यादी बाबींना महत्त्व प्राप्त झाले. बरेच शेतकरी खरेदी-विक्री, खर्च-उत्पन्न इत्यादी बाबींची नोंद ठेवून शेती व्यवसाय करतात. शेती व्यवसायातील कोणत्या उपक्रमातून किती फायदा-तोटा झाला हे हिशोब ठेवल्यामुळे समजते. पुढच्या वर्षाचे नियोजन करता येते. शेती व्यवसायाचे पृथ्थकरण केल्यामुळे त्याची प्रगती लक्षात येते व दोष काढून सुधारणा करता येते. शेती व्यवसायाचे नियोजन नियोजन म्हणजे तो एक आराखडा असून त्यात पुढच्या कामासाठी पूर्वकल्पना आखलेल्या असतात. शेती व्यवसायात कोणते उपक्रम राबवावेत, कोणत्या पद्धतीने राबवावेत व किती उत्पादन काढावे याचा अचूक अंदाज घेतला जातो. तसेच झालेले उत्पादन कोठे व केव्हा विकावे, उत्पादित माल किती दिवस गोदामात ठेवावा व त्यानंतर तो कुठल्या बाजारपेठेत विकावा याची पूर्वकल्पना केली जाते. बरेचशे शेतकरी शेतीचे नियोजन अलिखित किंवा मनातल्या मनात करतात. पण नियोजन शास्त्रो्नत व लिखित करणे आवश्यक आहे. शेती नियोजन म्हणजे एकात्मिक व आधुनिक कार्यक्रमाची रूपरेषा असून त्यातून व्यवसायाच्या विकासाविषयी अंदाज घेतला जातो. शेती नियोजन शेतकर्याला होकायंत्रासारखे उपयोगी पडते. त्यामुळे शेती व्यवसाय योग्य पाऊलखुणांनी चालतो. शेती नियोजनाचे महत्त्व सांगताना असे निदर्शनास आले आहे की, अस्तित्वात असलेल्या उत्पादन तंत्रात नियोजन केल्यामुळे शेती व्यवसायाच्या उत्पादनात वाढ होते. नियोजन एक शिक्षणाचे हत्यार आहे. ते शेतकरी व विस्तार कार्य करणार्या व्य्नतींना उपयोगाचे आहे. शेतकर्यांनी यात लक्ष घातल्यास नियोजनाची बाब सोपी आहे. ते सहज करू शकतात. नियोजनामुळे व्यवसायात वेळोवेळी बदल करता येतात. तसेच त्यातील मर्यादा, अडचणी समजताच साधनसामुग्री विषयी माहिती मिळते. थोड्नयात उत्पादनाची कोणती पद्धत कोणत्या उपक्रमासाठी योग्य आहे हे नियोजनामुळे समजते. व्यवसायातील गरजा जसे बियाणे, खते, इतर सामुग्री विविध उपक्रमांसाठी किती लागेल हे समजते. या सर्व सामुग्रीसाठी एकूण चालू भांडवल किती लागेल याचा अंदाज येतो. नियोजनाचा मुख्य उद्देश शेती व्यवसायातून उत्पन्न वाढवणे हा आहे. तसेच अंतिम उद्देश शेतकरी व त्यांच्या कुटुंबाचे राहणीमान उंचावणे हा होय. शेती नियोजनातील विविध तंत्र शेती नियोजनात साधनसामुग्रीचा कार्यक्षमतेने वापर होणे आवश्यक आहे. त्यासाठी उत्पादन कार्य तंत्र (प्रॉड्नशन फं्नशन) या तंत्राच्या आधारे उत्पादनात वापरलेली जमीन, मजूर, बैलजोडी, खते, बियाणे, कीटकनाशके, पाणी इत्यादींचा वापर किती करावा याच्याबद्दल पूर्वकल्पना करता येते. सरळ कार्यक्रम तंत्र (लिनियर प्रोग्रामिंग) याचा शेती नियोजनात खूपच उपयोग होतो. निवडलेल्या मर्यादित शेती उपक्रमात असलेल्या मर्यादित साधनांचा जास्तीत जास्त नफा व कमीत कमी खर्च यासाठी अतिउच्च तंत्रज्ञान म्हणून याचा वापर करतात. वक्रता कार्यक्रम तंत्र. (नॉनलिनियर प्रोग्रामिंग) या तंत्राचा वापरसुद्धा उत्पन्न जास्त व खर्च कमी म्हणून शेती नियोजनात करता येतो. तसेच गतिमान कार्यक्रम (डायनॅमिक प्रोग्रामिंग) ज्या उपक्रमातून झालेले उत्पन्न व साधनांचा चालू भाव गृहीत धरून या तंत्राचा वापर जास्त उत्पादन व कमी खर्च पूर्वकल्पनेसाठी नियोजनात करतात. फेरबदल तंत्र (ड्रायव्हरसीफिकेशन मॉडेल) या तंत्रानुसार शेती व्यवसायात फायद्याचे उपक्रम वापरले जातात. त्यात जमीन व भांडवल योग्यरीतीने विभागून दिले जाते. या तंत्राचा उपयोग शेती नियोजनात जोखीम कमी करणे व जोखीम पत्करण्याची क्षमता वाढवण्यासाठी होतो. तसेच शेती व्यवसायाचा कारभार नीट चालविण्यासाठी खर्च, उत्पन्न, माहिती गोळा करणे, हवामानाचा अंदाज, व्यवस्थापनातील सल्ला कराराची शेती इत्यादी शेती व्यवसाय व्यवस्थापनात विचार होणे आवश्यक आहे. तसेच मागणी, पुरवठा किमतीविषयी योजना इत्यादींसाठीसुद्धा शेती व्यवसायात महत्त्वाच्या समजल्या जातात. जमा खर्चाचे अंदाजपत्रक हे नियोजनातील महत्त्वाचे तंत्र समजले जाते. शेती व्यवसायाचे अंदाजपत्रक पूर्वकल्पनेच्या रूपात शेती व्यवसाय नियोजन रूपांतर खर्च, उत्पन्न व निव्वळ नफा यामध्ये करतात. त्याला शेती अंदाजपत्रक असे म्हणतात. शेती व्यवसायाची मिमांसा अथवा पृथ्थकरण करण्यासाठी एक वर्षाचा कालावधी लागतो. तो कालावधी कोणत्याही तारखेपासून चालू करता येतो. जसे आर्थिक वर्ष 1 एप्रिल ते 31 मार्च असे धरतात. काही भागात कृषी वर्ष 1 जुलै ते 30 जून असे धरले जाते. थोड्नयात एक वर्षाचा कालावधी सोयीप्रमाणे धरावा व पुढे वर्षानुवर्षे तोच कालावधी शेती नियोजन व अंदाजपत्रकासाठी वापरावा. एका वर्षात विविध उपक्रमांवर पूर्व उत्पन्नात आधारीत खर्च उत्पन्न व नफा यांची नोंद करावी. त्यासाठी पिकाखाली असलेल्या क्षेत्रफळानुसार तसेच गायी, म्हशी, शेळ्या यांच्या कळपानुसार त्यांचे स्वतंत्र खर्च उत्पन्न व नफा असे पत्रक बनवणे आवश्यक आहे. तसेच शेती व्यवसायाचा सारांश रूपाने खर्च उत्पन्न व नफा काढावा. स्वतंत्र पत्रक बनवताना पहिल्या स्तंभात पिकाचे नाव/ कळपाचा प्रकार, दुसर्या स्तंभात पिकाखालील क्षेत्र/ कळपातील जनावरांची संख्या तिसर्या स्तंभात खर्च ‘क’/ एकूण खर्च, चौथ्या स्तंभात एकूण उत्पन्न व पाचव्या स्तंभात निव्वळ नफा असा आराखडा करून नोंद करावी. त्यानंतर तिसर्या, चौथ्या व पाचव्या स्तंभाची एकानंतर एक उभी बेरीज करावी. नमुना तक्ता 1) पिकाचे नाव – गहू, पिकाखालील क्षेत्र 1 हे्नटर, एकूण खर्च ए्नस, एकूण उत्पन्न ए, एकूण नफा ए-ए्नस. 2) हरबरा – पिकाखालील क्षेत्र 1 हे्नटर, एकूण खर्च-वाय, एकूण उत्पन्न बी, एकूण नफा बी-वाय. 3) ज्वारी – 1 हे्नटर, एकूण खर्च झेड, एकूण उत्पन्न सी, एकूण नफा सी-झेड एकूण 3 हे्नटर, एकूण खर्च ए्नस+वाय+झेड, एकूण उत्पन्न ए+बी+सी, एकूण नफा (ए-ए्नस)+ (बी-वाय)+ (सी-झेड). अशा रीतीने संपूर्ण शेती व्यवसायात वर्षाकाठी एकूण खर्च उत्पन्न व निव्वळ नफा किती झाला ते समजते. वर्षाकाठी त्या सर्व उपक्रमांचा प्रत्यक्ष निकाल एकूण खर्च, उत्पन्न व नफा काय आला हे पाहणे आवश्यक आहे. अंदाजपत्रकाच्या आलेल्या निकालानुसार पुढच्या वर्षाचे अंदाजपत्रक तयार करावे. कारण आधुनिक शेती व्यवसायासाठी ही महत्त्वाची बाब आहे. नाही तर शेतकरी बेहिशोबी शेती करतात. त्यांची स्थिती लागाम नसलेल्या आंधळ्या घोड्यावर बसलेल्या व्य्नतीसारखी असते, अशी म्हण आहे. म्हणून हिशोब ठेवून शेती करणे ही काळाची गरज आहे, असे सिद्ध होते. केवळ हिशोब ठेवून फायदा नाही तर त्याचे वर्षाकाठी पृथ्थकरण करणे गरजेचे आहे. वस्तुस्थिती संदर्भ कृषी विज्ञान केंद्र, तालुका कृषी अधिकारी, कृषी विभाग, महाराष्ट्र शासन यांच्या संयु्नत विद्यमाने ‘शेतकरी’ शेती शाळांचे अशा विविध उपक्रमातून प्रशिक्षण दिले जात आहे. तसेच सर्व पिके व जोडधंदे यास चांगले महत्त्व दिले जात आहे. यात प्रशिक्षणार्थींना साहित्यरूपाने नोंदवही, पेन, दप्तर, हॅट इत्यादी सुविधांची व्यवस्था केली जाते. या प्रशिक्षणात शेती व्यवसाय व्यवस्थापन या विषयास महत्त्व देण्यात आले आहे. तसेच शेतीचा हिशोब, नियोजन अंदाजपत्रक, शेती भांडवलाचे व्यवस्थापन व बाजार नियोजनाच्या बाबींचादेखील समावेश आहे. त्याचबरोबर घरखर्च व्यवस्थापन कृषी तंत्र विस्तार शिक्षणाचाही समावेश आहे. हा उपक्रम ‘स्त्री’ शेतकर्यांसाठी महत्त्वाचा आहे. अशा रीतीने शेती व्यवसायात नक्कीच भरभराट होईल. कारण यात बँक, सोसायटी व बाजार व्यवस्था, सरकारी योजना इत्यादी विषयांवर भर दिला आहे.
अशीच एक वेगळे नियोजन यशस्वी शेतीकरिता
www.deshdoot.com तसेच अशोक आरगडे,ओम शेती, विश्वनगर, पुणे हायवे ग्रीन गोल्ड सिड जवळ, वाळूज तालुका गंगापुर, जिल्हा औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत 431133. आपला आभारी असेल
संदर्भ व साभार : http://www.deshdoot.com तसेच अशोक आरगडे,ओम शेती, विश्वनगर, पुणे हायवे ग्रीन गोल्ड सिड जवळ, वाळूज तालुका गंगापुर, जिल्हा औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत 431133.

Tuesday, 18 February 2020

Mai kartik bol raha hu ( take-3)

i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcorse)

i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.
every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.
( last, yo to hona hi tha is my new addition inspired from new film saand ki aankh)

my script attempt-3

कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ

डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड,
आलीया और रणबीर की शादी होनेवाली है, कुछ फोटोज instagram पर post किये है,
लेकिन रणवीर dumb के जैसा act कर रहा है.
क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद कुछ पंक्तीया याद आ रही है..
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ....ड

डॅड : " पान में पुदीना देखा, नाक का नगीना देखा
चिकनी चमेली देखा, चिकना कमीना देखा "

कार्तीक : डॅड, आप कमीना किसे कह रहे हो?

डॅड : देखो बेटे,
"
मेरी बात, तेरी बात, ज़्यादा बातें बुरी बात
थाली में कटोरा लेके, आलू भात, मुरी भात "

कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की......
" इसपे भूत कोई चढ़ा है,
   ठहरना जाना ना
अब तो क्या बुरा क्या भला है
फ़रक पहचाने ना
ज़िद्द पकड़ के खड़ा है कमबख्त
छोड़ना जाने ना
बदतमीज़ दिल…बदतमीज़ दिल…
बदतमीज़ दिल…माने ना…माने ना "

कार्तीक : डॅड, आप कहना क्या चाहते हो?

डॅड : बेटे,फोटो देख कर तुम इतना तो समझ ही गये होंगे के वोह excited नही है,कम से कम excited होने की acting तो कर सकता था !
रणवीर और विराट के जैसा यह "husband-material" नही है, यह बात आलिया के ध्यान में नही आली yeah ?

कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: यो तो होणा ही था !

Sunday, 26 January 2020

इंद्रायणी तांदळाच्या पसंतीत वाढ, गुणांच्या बळावर अवघ्या तीस वर्षांत लोकमान्यता

Good report by shri.Ashok Tupe
(Thanks to loksatta dated 27-Jan-2020)

इंद्रायणी तांदळाच्या पसंतीत वाढ

गुणांच्या बळावर अवघ्या तीस वर्षांत लोकमान्यता


अशोक तुपे

आंबेमोहराप्रमाणेच सुगंधित, चवीला गोड, खाण्यास मऊ , पण थोडा चिकट असलेल्या इंद्रायणी तांदळाची लोकप्रियता गेल्या काही वर्षांत राज्यभर वाढू लागली असून  पुणेकरांच्या पसंतीला उतरलेल्या या मावळातील तांदळाने आता मुंबईकराच्या थाळीतही स्थान मिळविले आहे. अवघ्या तीस वर्षांपूर्वी विकसित करण्यात आलेल्या इंद्रायणी तांदळाच्या गुणांमुळे त्याला मुख्य आहारात वाढत चाललेली मागणी लक्षणीय आहे.

आंबेमोहोर हा तांदळाचा देशी वाण. त्याच्या सुगंधाबरोबरच गोड चवीमुळे तो बासमतीप्रमाणेच शेकडो वर्षे खवय्यांच्या पसंतीला उतरलेला होता.  पेशवाईच्या काळात तर आंबेमोहोर तांदळाच्या पंगती उठत. सेंद्रिय पद्धतीने पिकविल्या जाणाऱ्या या तांदळाचे उत्पादन पाऊस अधिक झाल्यास कमी होते. त्यावर करपा रोगही होतो. या अडचणींना सोडविण्यासाठी राहुरीच्या महात्मा फुले कृषी विद्यापीठाच्या वडगाव मावळ येथील संशोधन केंद्रात आंबेमोहोर व १५७ आयआर ८ या दोन तांदळाच्या जातींचा संकर करण्यात आला. त्यातून १९८७ साली इंद्रायणी ही जात विकसित करण्यात आली. मावळ, वेल्हा, भोर, मुळशी, जुन्नर, आंबेगाव, राजगुरुनगर, वाई, जावळी, पाटण, कराड, नगर जिल्ह्य़ांतील अकोले, नाशिकच्या धुळे, नंदुरबार या भागांत त्याचे उत्पादन सुरू झाले. त्यानंतर शेतकरी आंबेमोहोरऐवजी या तांदळाकडे वळले. आता सह्य़ाद्रीच्या कडेला असलेल्या सखल भागात कोल्हापूरपासून ते घोटीपर्यंत त्याची लागवड सुरू झाली. त्याची लागवड ही विदर्भातही सुरू झाली आहे. मात्र पुणे जिल्ह्य़ातील मावळातील जमिनीतील गुणधर्म, हवामान, पाणी त्याला खूप मानवते. त्यामुळे अन्यत्र लागवड झालेल्या तांदळापेक्षा तो चवीला व सुगंधाला खूपच चांगला असतो.

आता इंद्रायणी तांदळातही भेसळ सुरू झाली आहे. काही लोक हे अन्य भागात पिकविलेला तांदूळ इंद्रायणी नावाने बाजारात आणतात. त्याला सुगंध यावा म्हणून काही रासायनिक पूड वापरली जाते.  विशेष म्हणजे काही सुगंधी द्रव्यांना अन्न व औषध प्रशासनाची मान्यता आहे. त्यामुळे त्यांच्यावर कारवाई होत नाही. मात्र हा तांदूळ धुतला की त्याचा सुगंध जातो. ग्राहकांनी या फसवणुकीपासून सावध राहण्याची गरज आहे.


चिकट का?
बासमती तांदूळ हा मोकळा असतो. तो बिर्याणीसाठी लोकांना आवडतो; पण आमटीभात, पिठलंभात, दाळभात, भाताचे मेतकूट, दाळ खिचडी याकरिता मात्र त्याची गोडी अधिक असते. त्यामुळे त्याला अधिक मागणी आहे. तांदळामध्ये अमायलुज हा घटक २० टक्क्यांपेक्षा कमी असला की तो मऊ, चिकट होतो. इंद्रायणीमध्ये अमायलुज हा घटक १८ ते १९ टक्के आहे. त्यामुळे तो चिकट होतो. आता राष्ट्रीय स्तरावर तांदूळ संशोधनाची मानके निश्चित करण्यात आली आहेत. त्यामध्ये अमायलुज हा घटक २० ते २५ टक्के असेल तरच कृषी अनुसंधान परिषद भाताची जात प्रसारित करायला संशोधन संस्थांना मान्यता देते. मात्र इंद्रायणी हा मानकांची निश्चिती करण्यापूर्वी प्रसारित झाला. त्यामुळे त्याला मान्यता मिळाली.
भौगोलिक मानांकन आवश्यक..
त्याला तांदळाच्या गिरणीमध्ये दोन-तीन वेळा पॉलिश करतात. त्यामुळे तो पांढराशुभ्र असा दिसतो. इंद्रायणीचा सुगंध हा टूएपी या घटकांमुळे येतो. मात्र सुवासाकरिता अनुकूल हवामानही लागते. तांदळाचे पीक फुलोऱ्यात असताना आद्र्रता ही ६९ ते ७४ टक्के लागते तरच त्याला सुगंध येतो. डोंगरदऱ्याच्या कडाकाठाला त्याचा सुगंध व चव आणखी वाढते. आता जरी अन्यत्र घेतला जात असला तरी त्याला पूर्वीसारखी गोडी मात्र काही आलेली नाही. इंद्रायणी हा खवय्यांच्या पसंतीला उतरला. त्यामागे मावळातील जमिनीचे गुणधर्मही कारणीभूत आहेत. मात्र हा संकरित तांदूळ असल्याने त्याला भौगोलिक मानांकन मिळत नसल्याचे या क्षेत्रातील तज्ज्ञ गणेश हिंगमिरे  यांनी ‘लोकसत्ता’शी बोलताना सांगितले.

आणखी एक वाण..
वडगावमावळ येथीलच संशोधन केंद्रात इंद्रायणी व सोनसळी या दोन तांदळांच्या प्रजातीचा संकर करून फुले समृद्धी ही जात विकसित करण्यात आली. हा भात इंद्रायणीपेक्षा कमी चिकट आहे. सुगंधही इंद्रायणीसारखाच आहे. त्याची पाने रुंद आहेत. इंद्रायणीपेक्षा कमी दिवसांत तो तयार होतो. मात्र आता फुले समृद्धी ही जातच इंद्रायणी म्हणून सर्वत्र ओळखली जाते. राहुरीच्या महात्मा फुले कृषी विद्यापीठाने २००७ साली कुठलाही वाण प्रसारित केला तर त्यामागे फुले हे नाव लावण्याचा निर्णय घेतला; पण इंद्रायणी त्यापूर्वी प्रसारित झालेला होता. त्यामुळे त्याच्यामागे फुले हे नाव लागले नाही. मात्र नंतर फुले समृद्धी, फुले सुगंधा, फुले मावळ हे तांदळाचे नवीन वाण आले. फुले समृद्धी हा वाण इंद्रायणी या नावानेच बाजारात विकला जातो.
आंबेमोहोरचे पिल्लू..
राज्यातील आंबेमोहोर व आजराघनसाळ या दोन तांदळाला भौगोलिक मानांकन मिळाले आहे. दोन्ही तांदूळ हे बिगरबासमती असून त्यांना जगभर मागणी आहे. मात्र त्याची लागवड थांबली असून फार मोजकेच शेतकरी लागवड करतात. बाजारात आता आंबेमोहोर तांदूळ फारच अल्प प्रमाणात उपलब्ध आहे. दुधाची तहान ताकावर भागविणे असा प्रकार झाल्याने खवय्ये हे इंद्रायणीकडे वळले. आंबेमोहोरचे सारे गुणधर्म इंद्रायणी तांदळात आले आहेत. त्याला आंबेमोहोरचे पिल्लू असेही गमतीने म्हटले जाते.
नामकरण कसे?
खवय्यांना एकाच प्रकारचा तांदूळ चालत नाही. त्यामुळे बासमतीप्रमाणेच अन्य तांदूळही त्यांच्या जिव्हा तृप्त करतात. त्यामुळेच इंद्रायणीने आपले स्थान बाजारात बळकट केले आहे. पुणे जिल्हय़ातून इंद्रायणी नदी वाहते. वारकरी संप्रदायात तिला विशेष महत्त्व आहे. त्यामुळे वडगावमावळला हा संकरित वाण प्रसारित केला. तेव्हा त्याला म्इंद्रायणीचे नाव देण्यात आले.

वैशिष्टय़े काय?
* आंबेमोहोरसारखाच सुगंधी, गोड, खाण्यास मऊ, मात्र काहीसा बुटका, उष्ण हवामानालाही काही प्रमाणात अनुकूल, जिवाणूजन्य व करपा रोगास प्रतिकारक असलेल्या या वाणाचे उत्पन्न चांगले येते.
* इंद्रायणी हा पचायला खूपच चांगला तांदूळ आहे. तो मऊ  असल्याने लहान मुले व वृद्धांना चावायला त्रास होत नाही.
* तुपट असल्याने तूप नसले तरी डाळभात चांगला लागतो. गावरान तुपाने तर त्याची चव आणखीच वाढते.  पण हा तांदूळ थंड झाला की कडक होतो. त्यामुळे तो गरमच खावा लागतो.

Friday, 22 November 2019

Mai Kartik bol raha hu ( take-2) 22-Nov-2019

i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcource)

i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.
every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.
( last, yo to hona hi tha is my new addition inspired from new film saand ki aankh)

my script attempt
script-2: 22nd- Nov - 2019

कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ

डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड, महाराष्ट्र में SS,NCP और Congress मिल के महाविकास की खीचडी सरकार बना रही है,
क्या ये वोटरोंने दिये हुये clear mandate का अपमान नही है?
क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद कुछ पंक्तीया याद आ रही है..
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ........ड

डॅड : बेटे
Sonia कितना सोणा है,
'सेना' जैसा तेरा मन,
सुन सुन  सुन क्या केहती है,
दीवानी दिल की धडकन,
तू मेरा
तू मेरा
तू मेरा

तू मेरा CM नंतर बन
(for अमराठी ppl,
नंतर = afterwards / बाद मे)

Bete,
Sleeping with the Enemy has been remade by Bollywood THREE times .. Oh wait, make that FOUR times
sorry sorry,
correct that to FIVE times.


कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की......
sleeping with the enemy की ये भ्रष्ट नकल है.


कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: यो तो होणा ही था !

Tuesday, 19 November 2019

Yoni chya manichya gujgoshti....reveiw : Deserved Loud Appluad !!



काल संध्याकाळी 19 Nov 2019 मी हे सादरीकरण पाहीले.

खरं तर ब-याच दिवसापासून हा प्रयोग पहायचा होता.पण माझी वेळ जूळत नव्हती.

सकाळी पेपर वाचतांनाच घरात declare केलं, मला जायचचं आहे, दिवसभर busy होतो,विसरुन गेलो,6:30 pm ला reminder वाजला.
दूसरी कामं आठवली,
सगळी कामे cancell करुन तडक ज्योत्स्ना भोळे सभागृहाकडे रवाना झालो.

wow काय सादरीकरण झालं,
incredible.
ह्या नाटकातलेच संवाद वापरुन मी म्हणेन,
" हो मी तिथचं होतो...
   परंपरेचं जोखड झूगारुन काही साहसी स्रिया एका taboo विषयावर standing tall होऊन एक नवी दृष्टी देत होत्या.

 हो मी तिथचं होतो...

 पुण्यातला सुशिक्षीत माणसं आणि मुलीसुद्धा या विषयावरचं धाडसी नाटकं अतिशय healthy पद्धतीने receive करत होते,
 हो मी तिथचं होतो...

एका अतिशय महत्वाच्या विषयावरची वैचारीक जळमटे स्वच्छ करीत होत्या...
हो मी तिथचं होतो.

 प्रेक्षक कधी हसत,कधी टाळ्या शिट्या वाजवत तर कधी सुन्न होत होते..
 हो मी तिथचं होतो...
 योनीच्या मनीच्या गुजगोष्टी अनूभवत
 हो मी तिथचं होतो..."

माझ्या सुदैवाने audience ची "समझ" खूप छान होती.
लोक्स खूप lively होते (जे की अतिशय आवश्यक होतं ) आणि ते correct ठिकाणी applaud करत होते,
मनापासून हसत होते
आणि काही वेळा सून्न होत होते.

आता कलाकारांबद्दल...
एकचं शब्द ...'नतमस्तक'

i bowed my head to वंदना खरे madam and team with respect !

कारण त्यांनी एका taboo विषयाकडे
मान वर करुन अभिमानाने पहायला शिकवले.

well,मी एक mature व्यासंगी माणूस आहे, फक्त एकचं सांगतो,
हा प्रयोग पहातांना i missed presence of my daughters (28 and 25) and niece.(20)

नक्की मी त्यांना next opportunity मधे नक्की पहा म्हणून सांगीन ( कदाचित त्यांनी original book वाचले असेल,i donno कधी विषयच निघाला नाही)

दोनशे लोकांच्या समोर उभे राहून खणखणीत आवाजात ह्या शब्दांचा उच्चार करण्यासाठी खरचं धैर्य लागतं,
पण त्यांचा approach इतका convincing आहे कि आपणही मनमोकळे होतो.

ह्या प्रयोगात inact करणा-या मुलींचं मला कौतूक करु दे,खूप छान,खूप छान,
really u all have guts ते प्रेक्षकांपर्यत correct पद्धतीने पोचवल्याबद्दल.

script writer आणि कलाकार वंदना ,
छा गयी ,toooo good.

विषय cover करण्यासाठी लेखीकेने सर्व प्रकारचे sample cases घेतल्या आहेत ,मला वाटतं सुचवण्या सारखं काहीच नाहीये, तरी पण if possible एकाद्या डाॅक्टरांची मुलाखत screen करता येईल का?!
श्रीरंग गोडबोले  नाटक+ screen असे नवीन form असलेलं एक नाटक तिथेच पाहिल्याचं आठवतय.

highlighting scene :
मला वाटतं ,ती फोन वर बोलतं असलेला scene सर्वांनाच spell bound करुन गेला,
"मला तुला एकदा पहायचय"

आणि कामेश्वरीदेवी चा scene ...
mindblowing...
hats off.
प्रेक्षकांनी थिएटर डोक्यावर घेतलं.

overall conclusion ?
deserved loud appluad.
Standing ovation.

( kindly excuse मी कलाकारांची नावं लक्षात ठेऊ शकलो नाही,
mobile बंद करा म्हटल्यावर मी खरचं बंद केला,
शेवटचा... कलाकार प्रेक्षकांचे अभिवादन स्विकारत असतांना मला photo /video घ्यायचा होता पण mobile start होई पर्यंत तो moment निघून गेला.)

Sunday, 10 November 2019

शेवगा लागवड (drumstick (moringa)plantaion



Note :मला शेतीचा काही म्हणजे काहीच अनूभव नाही.

1) SILC सकाळ इंटरनॅशनल लर्नींग सेंटर,पुणे येथे "शेवगा लागवड" हा दोन दिवसांचा कोर्स केला.

2) बहूगुणी शेवगा


3) शेवगा च का ??
    उत्तरासाठी पहा video.
    https://youtu.be/kdeSgrW4ve4


4) काॅट्रॅक्ट फार्मींग:
    आमच्या ओळखीचे स्नेही श्री. करवंदे यांच्या पोलीहाऊस च्या बाजूला 10 गुंठे जागा मोकळी होती.

5) खर्चा चा हिशोब:
     a) Rs.56,000/--

     b) Rs.2000/-- (JCB)

     c)Rs.4800/--
11 July 2019,400 रोपे कांचन नर्सरी (उरळी कांचन) येथून आणली.(shevga :coimbatore pkm1)


      d) Rs.1500
         आधारासाठी 300 बांबुच्या काठ्या (3feet) आणल्या.

       e) Rs.5000/--
     Gandulkhat 300 kg Rs 3000
Drip material , rotavetar,etc Rs 2000

      f)
      g) Rent and maintenance charges for periods October to March are due . The details are as under
Rent Rs 3000 per month
Labor and maint Rs 6000 per month. The total Rs 54000

RS.1,23,300

----------------------------------------
01-Nov-2019



अपेक्षा पेक्षा काहीच वाढ नाही.
शेवग्याला पाणी कमी लागते, पाऊस जास्त झाला हे कारण असावे असे समजून गप्प राहीलो.

--------------------------------------------------
श्री.करवंदे यांनी हरबरा हे आंतरपीक घ्यावे असे सुचवले, yes Try करुया.
----------------------------------------
        22-Dec-2019


प्रश्न: शेवगा 6-8 फूट झालाय,शेंडा छाटणी कधी करायची ??please सल्ला द्यावा ही विनंती.
मला वाटतं शेतकामगाराचे हात शेंगेपर्यंत पोचले पाहिजेत,त्यामूळे आताच शेंडे मारावेत(छाटावेत)


-------------------------------------------------


Payment  from April To September-2020, 6 months.
Rs 54000 paid on 04- May-2020

आतापर्यंत खर्च : Rs.1,77,300

---------------------------------------------------
                       07 May 2020

-------------------------
23-July- 2020  photos



आणि हे कोरोना ची जागतिक महामारी आली,
मी आठ महिने परदेशात कामानिमीत्त अडकलो होतो,
श्री.करवंदे यांना दिवाळीत भेटू असे मेसेज दिले होते,
दिवाळीत आलो तर ते अत्यंत आजारी असल्याचे कळले, वाटलं
ते बरे होऊन भेटतील, पण नियतीच्या मनात वेगळेच असावे,
अचानक,श्री करवंदे गेल्याची धक्कादायक बातमी कळली.
ते माझे मित्र,तत्वज्ञ,वाटाड्या होते, god-father होते, त्यांचे शेती व जिवनातील गप्पांबरोबर खूप  प्रेरणा मिळत होती.

"उसवलं गनगोत सारं आधार कुनाचा न्हाई,
भेगाळल्या भुईपरी जीणं, अंगार जीवाला जाळी,
हरवली वाट, दिशा अंधारल्या दाही
ववाळुनी उधळतो जीव मायबापा
वनवा ह्यो उरी पेटला"

अशी मनाची अवस्था झाली, सोन्यासारख्या माणसांना देव का अकाळी नेतो ?!!

पण show must go on या उक्ती प्रमाणे आता त्यांना गुरु मानून एकलव्यासारखं पुढे जायचं ठरवलं आहे.
Payment  from April To September-2020, 6 months.
Rs 54000 paid on 04- May-2020

आतापर्यंत खर्च : Rs.1,77,300

Rs 54000 paid on Jan-2021

आतापर्यंत खर्च : Rs.2,31,300
(2 Lakh 31 thousand only)
----------------------------------------------------
12-Feb- 2021

पहिल्यांदा शेवगा शेंगा लागलेल्या दिसताहेत.
2 अडीच किलो असतील का?




आता जरा व्यावहारीक ताळेबंद मांडतोय,
90 झाडं जगलीत.
90 kg जर शेवगाशेंगा मिळाल्या तर 
90 * Rs.60 = Rs.5400 मिळतील.
महीन्याला Rs.9000 ( 9 हजार) खर्च करतोय.
शेतीतज्ञांचा सल्ला घेतला पाहीजे.
----------------------------------------------------
12-Feb- 2021

मित्रांना WA post लिहीली.
for my शेवगा adventure,
some product started showing up.

2 kg शेवगा  may sell @ Rs.60 / kg 
( we buy @ Rs.160/kg, आपल्याला कळत नाही कारण आपण 4-5 च घेतो.)

so i wl get Rs.120
 i spent so far Rs.2,30,000

मला शेवगा सव्वा लाख / kg पडतोय
( तेवढ्यात 2 kg चांदी येईल)
बहूत बेइंसाफी है!!

but beer factory also has initial beer cost Rs.20,000 / bottle
later on cost drops to 20 paise.)

मी आता दो राहे वर उभा आहे
 यात continue करावे. की झाले तेवढे पुरे म्हणून
 कंत्राटी शेतीला good bye रामराम करावे?
-------------------------------------------------

01-March-2021
निर्णय झाला.
stop loss वर शिक्कामोर्तब केले.
आणि ह्या कंत्राटी शेतीतून बाहेर पडलो.
भावना काय आहेत?
ना खेद ना खंत.
जे केले ते सोचसमझकर केले.
400 पैकि 90 झाडं जगली, वाढली.
काही किलो शेंगा हि आल्या. हि यशाची बाजू.

पण शेंगांचं नियोजन, त्या कोवळ्या असतांना काढून बाजारात विक्री करणे, छाटणी करुन फांद्यांना  मर्यादेत ठेवणं. सतत नुकसानीत Rs.9000 /महिना खर्च करत रहाणं परवडलं नाही. ही अपयशाची बाजू.
its okay. No worries.
सध्या एवढेच.

------------------------------






Thursday, 7 November 2019

: Mai Kartik bol raha hu

i got this inspiration from FM radio (all rights reserved for them offcource)

i guess this is fantastic formate to comment on current affairs.
every time kartik calls his dad and gets irritated with dad's poetry, terrible English and phylosophy and requests dad to disconnect.
( last, yo to hona hi tha is my new addition inspired from new film saand ki aankh)

my script attempt
script-1: 8th- Nov - 2019


कार्तीक : मै कार्तीक बोल रहा हूँ
डॅड : बोलो बेटे. का बात है ?

कार्तीक : डॅड  SS के एक नेता ने अपने inexpiriened बेटेको CM बनाने के लिये पुरे state को ransom पर रखा है,क्या यह सही है?

डॅड : देखो बेटे, तुम्हारी बाते सुननेके बाद एक शेर याद आ गया...
मुलाहिजा अर्ज करता हूँ

कार्तीक : डॅ.........ड.

डॅड : एक तूना मिला,
        सारी दुनिया मिली भी तो क्या है,
        मुझको CM ना मिला,
        precident rule लगा भी तो क्या है.

     i did not get one you,
     what is the use of getting all world...

कार्तीक : इसका मेरी प्राॅब्लेमसे क्या connection ?

डॅड: देखो बेटे,हालाखी इसमें दो राय नही है  की...... पुत्रप्रेम आदमी को अंधा बना देता है, महाभारत के time से देखो,अंधे धृतराष्ट्रने अपने बेटे को राजपाट दिलानेके लिये कितने लायक योद्धाओंको नालायक की तरहा मार दिया...तो कलीयुग में ये तो लाजमी है.

कार्तीक : डॅड phone जल्दी से रखो, दूसरे call waiting में है

डॅड: यो तो होणा ही था !

Tuesday, 30 July 2019

visit to Wildenest (jungle resort)

On 27 July 2019 we were watching TV, horrified with  news of heavy rains and mahalaxmi train passengers rescued by helicopter and boats...
We had done booking to stay at wildernest(jungle resort) some 410 km away from Pune...

is it an insane decision to go to jungle in this heavy rains n floods ??

Logical mind was saying...drop the plan....cancel it ..just NOW.

And emotional mind was saying..Go,
review....if unsafe ...find nearby shelter / lodge or hotel and wait for normalcy n return home. ??!

Anyhow, we started from Pune on 28 July and reached Kolhapur by road.

In the night hearing continuous rains sound thinking howfar its safe  to go forest cottage in this rains...

We drove from Kolhapur to chorla ghat.
Kolhapur --> Belagavi (~110 km drive)
Belagavi --> Chorla ghat (~65km drive)


            Reached Wildernest.
Fascinated by staff military like uniform.

Sipping welcome drink.

swimming tank...no courage to enter in cold water !!


Strong wind and heavy lashing rains in forest.


Restaurant,prompt n helpful staff.

waterfall seen from restaurent

'mist'erious mist.....
~~~~~~~dream sequene ~~~~~~~~
perfect to shoot hounting song of a ghost movie...
'Mai to kab se khadi is paar, ye ankhiyaan
Thak gayi panth nihaar, aaja re e e e e e e e pardesi...

Tum sang janam janam ke phere, bhool gaye kyoon saajan mere
Tadpat rahoon main saanj savere, oh
Aaja re, aaja re e e e e e e e pardesi





Fog n greenery




dream stay overlooking jungle


Video: watching rain from cottage...


Second day:
After breakfast n tea, set out for
Jungle walk....two hours








This veiw is worth jungle walk.



Chorla waterfall !!

Video waterfall





5400 steps when returned in my  watch.
Returned to room had hot water bath (thanks wildernest staff management for providing hot water).

Checked out at 12:10 noon.
A jeep service dropped from reception to roadside 

Headed back to Kolhapur
It was a wonderful jungle stay experience at Wildernest !!

----------------***---------------***-----------****-----